इंडिया टुडे एनई और नॉर्थईस्ट टुडे के अनुसार, त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को संस्थागत देखरेख में रखी गई बच्ची को रिहा कर माता-पिता के पास भेजने का अंतरिम निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने अलग रखे जाने को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनी।
परिवार के वकील ने कहा कि बच्ची करीब चार महीने से माता-पिता से अलग थी और उन्होंने इस व्यवस्था के कानूनी आधार पर सवाल उठाया। नॉर्थईस्ट टुडे ने उनके हवाले से उसी दिन रिहाई और परिवार से मिलने की खबर दी। यह रिपोर्ट की गई अंतरिम राहत है; अधिकारियों के बारे में वकील के आरोप अंतिम अदालती निष्कर्ष नहीं हैं।
अदालत ने राज्य से हलफनामा मांगा है और व्यापक याचिका पर विचार बाकी है। देखी गई खबरों में राज्य की सीधी प्रतिक्रिया या हस्ताक्षरित आदेश उपलब्ध नहीं था। उनसे मुआवजा दिए जाने का फैसला भी स्थापित नहीं होता। बच्चे की पहचान बताने वाले विवरण और विवादित पृष्ठभूमि शामिल नहीं की गई है।
