कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के बाहर चार अक्टूबर को फिर टकराव हुआ। बांगिया हिंदू जागरण मंच का मार्च संस्थान के गेट तक पहुंचा तो पुलिस ने परिसर में प्रवेश की कोशिशों को रोका। छात्रों और शिक्षकों ने आरोप लगाया कि बाहर से पत्थर और बोतलें फेंकी गईं। द इंडियन एक्सप्रेस और द टाइम्स ऑफ इंडिया ने स्वतंत्र रूप से घटना की रिपोर्ट दी। रविवार का यह नया टकराव 27 सितंबर को परिसर में हुई हिंसा से अलग है।
मार्च अजय नगर से संस्थान की ओर आया था। द स्टेट्समैन के अनुसार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अंदर जाने से रोका और कई लोगों को गेट के पास से हटाया। द वीक में प्रकाशित पीटीआई के विवरण में एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि गेट पर तैनात कर्मियों ने प्रवेश रोका और कुछ लोगों की अंदर घुसने की कोशिश के बाद धक्का-मुक्की हुई। छात्र और शिक्षक परिसर के अंदर इकट्ठा थे; कुछ ने हेलमेट पहने थे। इन विवरणों से टकराव और पुलिस के हस्तक्षेप की पुष्टि होती है, लेकिन हर गतिविधि का पूरा क्रम तय नहीं होता।
छात्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने तीन अक्टूबर को कोलकाता पुलिस और राज्य सरकार को प्रस्तावित रैली से जुड़ी चिंता बताई थी और सुरक्षा मांगी थी। अखबार ने कोलकाता, पुणे और ईटानगर के फिल्म संस्थानों के छात्रों की ओर से सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को भेजे गए पत्र का भी उल्लेख किया। उसमें पिछली हिंसा के तुरंत बाद एसआरएफटीआई के पास मार्च होने पर चिंता जताई गई थी। इस रिपोर्ट के लिए मूल पत्राचार स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हुआ।
द स्टेट्समैन ने एक शिक्षक के ईंट लगने से घायल होने की खबर दी। मंच के सदस्यों ने अपने कुछ लोगों के भी घायल होने का दावा किया। द इंडियन एक्सप्रेस ने अलग से पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर दी। एएनआई ने खुद को कोलकाता पुलिस की विशेष शाखा का कर्मचारी बताने वाले एक व्यक्ति का आरोप दर्ज किया कि उसके साथ मारपीट हुई। समीक्षा की गई सामग्री में घायलों की स्वतंत्र रूप से सत्यापित कुल संख्या, अस्पताल के दस्तावेज या उस व्यक्ति की पहचान और विवरण की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
मंच ने जिम्मेदारी से इनकार किया। उसके दक्षिण बंगाल के प्रतिनिधि रोहित शॉ ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि पहले परिसर के अंदर से पत्थर और बोतलें आईं। उन्होंने अपने सदस्यों के जबरन प्रवेश की कोशिश करने से भी इनकार किया। एएनआई ने अलग से प्रदर्शनकारियों के बयान दर्ज किए, जिनमें उन्होंने वस्तुएं फेंकने या पुलिस से मारपीट करने के आरोप नकारे। आयोजकों ने कहा कि वे स्वामी विवेकानंद और भारत माता की तस्वीरों के कथित अपमान के विरोध में आए थे। छात्रों के विरुद्ध ये आरोप विवादित दावे हैं, स्थापित निष्कर्ष नहीं।
द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार छात्रों ने कुलपति और रजिस्ट्रार के इस्तीफे, माफी, शैक्षणिक गतिविधियां रोकने तथा संस्थान की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। कुलपति टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। ये छात्रों की बताई गई मांगें हैं, नया मामला दर्ज हो जाने की पुष्टि नहीं। द स्टेट्समैन ने भी रविवार की घटना पर संस्थान की तत्काल प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं होने की बात कही।
27 सितंबर की घटना, उसके बाद की शिकायतें और जांच इस मामले की पृष्ठभूमि हैं। उन्हें चार अक्टूबर की घटना पर हुई कार्रवाई नहीं समझना चाहिए। फिलहाल परिसर की सुरक्षा, चोटों की चिकित्सकीय पुष्टि और दोनों पक्षों के विरोधी विवरणों की जांच महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। इस रिपोर्ट के लिए समीक्षा की गई सामग्री में रविवार के आरोपों पर अंतिम पुलिस निष्कर्ष, नया हिरासत आदेश या विवाद तय करने वाला अदालती फैसला स्थापित नहीं हुआ।
