ओडिशा हाई कोर्ट ने एक अक्टूबर को वेदांता की उस याचिका को खारिज किया जिसमें ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन से पंद्रह करोड़ टन बॉक्साइट की आपूर्ति वाला पुराना समझौता लागू कराने की मांग थी। बिजनेस स्टैंडर्ड और टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार विवाद लांजीगढ़ एलुमिना रिफाइनरी के लिए मूल्य व्यवस्था से जुड़ा है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति मुरहारी श्री रमन की पीठ ने कहा कि खनन कानून बदलने के बाद मूल संयुक्त उद्यम 2015 में समाप्त हो चुका था। कंपनी पुराने समझौतों को फिर लागू नहीं करा सकती। अदालत ने नई दीर्घकालीन आपूर्ति व्यवस्था में वेदांता की बाद की भागीदारी भी दर्ज की। मामले की अंतरिम राहत हटा दी गई।
वेदांता का तर्क था कि आपूर्ति और कीमत के आश्वासनों के आधार पर उसने बड़ा निवेश किया। अदालत के अनुसार आश्वासन राज्य को कानून के विरुद्ध काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। कंपनी के प्रवक्ता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि आदेश और कानूनी विकल्प परखे जा रहे हैं, जबकि बॉक्साइट आपूर्ति प्रभावित नहीं है। फैसला अपने आप उत्पादन रुकने की पुष्टि नहीं करता।
