भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 30 सितंबर को बताया कि वह निर्माणाधीन 17 राजमार्ग परियोजनाओं का विशेष गुणवत्ता निरीक्षण कर रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, अतिरिक्त जांच उन परियोजनाओं पर केंद्रित है जिनकी बोली अनुमानित लागत से 15% से अधिक कम थी। पीटीआई ने भी उसी दिन इस घोषणा की रिपोर्ट प्रकाशित की।
चयन के अन्य मानदंड निर्माण लागत ₹500 करोड़ से अधिक और भौतिक प्रगति 35% से 80% के बीच होना हैं। परियोजनाएं कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश में हैं। इनमें नए कॉरिडोर, बाईपास और सड़क चौड़ी करने के काम शामिल हैं। जांच के लिए चयन किसी परियोजना में खराबी पाए जाने का निष्कर्ष नहीं है।
टीमें निर्माण को स्वीकृत नक्शों, तकनीकी विनिर्देशों, अनुबंध की शर्तों और गुणवत्ता योजनाओं से मिलाकर देखेंगी। सामग्री, कारीगरी, निर्माण के तरीकों और नमूनों की जांच के अभिलेखों के साथ सड़क सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और लागू पर्यावरणीय उपाय भी जांचे जाएंगे। एनएचएआई के अनुसार, विशेष टीमों के नेतृत्व के लिए विभिन्न सरकारी संगठनों के 39 अनुभवी और सेवानिवृत्त इंजीनियरों का समूह बनाया गया है। तकनीकी विशेषज्ञ उनकी सहायता करेंगे।
निरीक्षण का पहला चरण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। छह महीने बाद विशेषज्ञों की अलग टीमें दोबारा निरीक्षण करेंगी। मंत्रालय का कहना है कि अनुबंध के मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले काम में संबंधित प्रावधानों के तहत सुधार कराया जाएगा। यह कार्यक्रम नियमित निगरानी के अतिरिक्त है। घोषणा में किसी विशेष परियोजना की जांच के निष्कर्ष या किसी ठेकेदार के दोषी पाए जाने का विवरण नहीं दिया गया है।
