एक अक्टूबर को जारी वित्त मंत्रालय की सितंबर आर्थिक समीक्षा ने चेताया कि महंगा तेल, सख्त वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और मौसम संबंधी दबाव भारत के आर्थिक परिदृश्य को कठिन बना सकते हैं। रॉयटर्स, मनीकंट्रोल और एएनआई ने इस आकलन की अलग-अलग खबर दी। मंत्रालय ने घरेलू गतिविधि में मजबूती बताते हुए महंगाई, रुपये और पूंजी प्रवाह के जोखिम पहचाने।

मनीकंट्रोल की मौलिक खबर के अनुसार, मंत्रालय के मॉडल में जुलाई से सितंबर की वृद्धि का अनुमान 7.3 प्रतिशत है, जबकि पिछली तिमाही की बताई गई वृद्धि 7.8 प्रतिशत थी। यह अनुमान संबंधित अवधि का आधिकारिक जीडीपी नतीजा नहीं है। समीक्षा अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा बताती है और कहती है कि भारत लगातार वृद्धि को सुनिश्चित नहीं मान सकता।

ये संभावित दबावों पर मंत्रालय के आकलन हैं, हर जोखिम सच होने की पुष्टि नहीं। रॉयटर्स के अनुसार, सेवा निर्यात, विदेश से भेजी गई रकम और विदेशी मुद्रा भंडार सहारा बने हुए हैं। जांच के समय आधिकारिक संग्रह में मौजूदा समीक्षा दस्तावेज नहीं मिला। इसलिए इस रिपोर्ट के निष्कर्ष स्वतंत्र रूप से प्रकाशित खबरों पर आधारित हैं; मूल दस्तावेज सीधे पढ़ने का दावा नहीं है।