औषध विभाग ने 30 सितंबर को नई दवा की खोज के लिए वित्तीय सहायता का नया मार्ग घोषित किया। विभाग ने कहा कि उसकी पीआरआईपी शोध योजना के दूसरे दौर में आवेदन खुल गए हैं। आधिकारिक सूचना और बिजनेस स्टैंडर्ड की स्वतंत्र खबर के अनुसार, प्रति कंपनी, परियोजना या परियोजनाओं के समूह के लिए 50 करोड़ रुपये तक सहायता मिल सकती है। शर्त है कि लागत में कम से कम 25 प्रतिशत योगदान संस्थागत निवेशकों का हो।

यह मार्ग नई रासायनिक या जैविक दवाओं पर शुरुआती शोध करने वाले पात्र स्टार्टअप तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए है। उद्देश्य शोध को विकास के अगले चरण तक पहुंचाने में मदद करना है। शोध सहायता मिलना किसी उपचार की प्रभावशीलता, मरीजों के लिए नियामकीय मंजूरी या बिक्री की तैयारी का प्रमाण नहीं है।

विभाग ने अलग से बताया कि पहले दौर की 41 परियोजनाओं के लिए लगभग 1,600 करोड़ रुपये की सहायता मंजूर हुई है। यह अब तक की कुल स्वीकृतियों का आंकड़ा है। इससे सभी फैसले उसी दिन होने या राशि का भुगतान हो जाने की पुष्टि नहीं होती। पहले दौर के बाकी आवेदनों का मूल्यांकन जारी था।