रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 अक्टूबर को कहा कि वित्तीय व्यवस्था की मौजूदा मजबूती को भविष्य की स्थिरता की गारंटी नहीं मानना चाहिए। नई दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के उनके संबोधन पर दोपहर में जारी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने भू-राजनीतिक घटनाओं, साइबर हमलों और तकनीकी विफलताओं से जुड़े जोखिमों पर ध्यान दिलाया।

मनीकंट्रोल की 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक मल्होत्रा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन को वैश्विक बाजार में उथल-पुथल का संभावित कारण बताया। उन्होंने कहा कि इनमें गिरावट से कुछ पूंजी भारत की ओर आ सकती है।

मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल आसन्न संकट के संकेत नहीं दिख रहे हैं। उनका संदेश था कि नियामक और वित्तीय संस्थाएं कमजोरियों के संकट बनने से पहले तैयारी करें। इनमें निजी ऋण बाजार और साइबर खतरों से जुड़े जोखिम भी शामिल हैं। यह संबोधन जोखिमों का आकलन था, नीतिगत ब्याज दर की नई घोषणा नहीं।