एक अक्टूबर को सार्वजनिक हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बकाया ट्रैफिक ई-चालान वाले वाहनों की कई सेवाएं रोकने का निर्देश दिया गया है। एस. राजशेखरन की लंबे समय से चल रही सड़क-सुरक्षा याचिका में लिखित आदेश 28 सितंबर का है। एक अक्टूबर उसके सार्वजनिक होने की तारीख है, नई सुनवाई की नहीं।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने संबंधित वाहनों के पंजीकरण का नवीनीकरण, पंजीकरण प्रमाणपत्र की दूसरी प्रति, पते में बदलाव और फिटनेस प्रमाणपत्र जैसी सेवाएं रोकने को कहा। आदेश में परिवहन पोर्टल पर वाहन को काली सूची में डालने, मालिकाना हक का हस्तांतरण रोकने और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं देने के निर्देश भी हैं। कई उल्लंघनों के मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण रोकने और उसे निलंबित करने के कदम बताए गए हैं।

पीठ ने वाहनों की आकस्मिक जांच और जारी ई-चालान का पालन न होने पर वाहन जब्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सड़क परिवहन मंत्रालय की अक्टूबर 2025 की इलेक्ट्रॉनिक सड़क-सुरक्षा प्रवर्तन प्रक्रिया लागू करनी है।

ट्रैफिक जुर्माना बिजली के बिल के जरिए वसूलने का चर्चित सुझाव लिखित आदेश में शामिल नहीं है। मनीकंट्रोल और आईएएनएस ने एक अक्टूबर को स्पष्ट किया कि यह पिछली सुनवाई के दौरान दिया गया मौखिक सुझाव था। इसे बिजली के बिल में जुर्माना जोड़ने का लागू नियम नहीं बताया जाना चाहिए।

इन निर्देशों पर परिवहन और प्रवर्तन अधिकारियों को कार्रवाई करनी होगी। आदेश सार्वजनिक होने का अर्थ यह नहीं कि हर राज्य में सभी पाबंदियां पहले ही लागू हो चुकी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमल कैसे होता है।