केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 30 सितंबर को पेट्रोलियम अधिनियम, 1934 में संशोधन का मसौदा जारी किया। इसमें लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन को आपराधिक प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक जुर्माने के दायरे में लाने और गंभीर उल्लंघनों के लिए अलग अपराध निर्धारित करने का प्रस्ताव है। ये सुझाव परामर्श के लिए हैं, अभी लागू नए नियम नहीं हैं।

मसौदे के अनुसार, निर्णय करने वाला अधिकारी लाइसेंस की शर्त पहली बार तोड़ने पर 2.5 करोड़ रुपये तक और बाद के उल्लंघन पर 5 करोड़ रुपये तक सिविल जुर्माना लगा सकेगा। मसौदे की पड़ताल करने वाली रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारी सुधारात्मक कार्रवाई का निर्देश और लाइसेंस में बदलाव की सिफारिश भी कर सकेगा।

जिस गतिविधि के लिए लाइसेंस जरूरी है, उसे बिना लाइसेंस करने पर तीन साल तक जेल, 25 करोड़ रुपये तक जुर्माना या दोनों प्रस्तावित हैं। लगातार उल्लंघन पर अतिरिक्त दैनिक जुर्माना भी लग सकेगा। मंत्रालय का कहना है कि नियामकीय चूक और पेट्रोलियम संचालन तथा जनसुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों में अंतर करना इसका उद्देश्य है।

मंत्रालय की सार्वजनिक सूचना में 30 अक्टूबर तक टिप्पणियां और सुझाव मांगे गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, मसौदा और व्याख्यात्मक टिप्पणी उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध हैं तथा मिले सुझावों की समीक्षा होगी। आगे की कार्रवाई परामर्श और विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी; इस घोषणा से अधिनियम अपने आप नहीं बदलता।