चेन्नई की पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत ने आर. वीरमणि से जुड़ी कथित बाल यौन हिंसा की जांच में शांति और महेंद्र सिम्हन को 30 सितंबर को जमानत देने से इनकार किया। एनडीटीवी और दिनमणि ने फैसले की स्वतंत्र खबर दी। विशेष न्यायाधीश एस. पद्मा ने जांच के शुरुआती चरण का हवाला दिया।

अभियोजन ने दलील दी कि रिहाई से गवाहों को प्रभावित करने और पीड़ितों को धमकाने की आशंका है। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि आरोपियों को 24 घंटे में अदालत में पेश नहीं किया गया। वकीलों ने पूछताछ पूरी होने और आगे हिरासत की जरूरत न होने की दलील भी दी। ये दोनों पक्षों के तर्क हैं, किसी अनुचित आचरण के सिद्ध निष्कर्ष नहीं।

जमानत का फैसला दोषसिद्धि नहीं है। यह जांच से जुड़ी राजनीतिक और उच्च न्यायालय की कार्यवाही से अलग है। देखी गई सामग्री में हस्ताक्षरित जमानत आदेश उपलब्ध नहीं था। बच्चों की पहचान बताने वाले विवरण शामिल नहीं किए गए हैं।