दिल्ली की एक अदालत ने 29 सितंबर को रियल एस्टेट पेशेवर युवराज सिंह मंचंदा के शव से जुड़े पुलिस और चिकित्सकीय कामकाज में साक्ष्य गायब होने की आशंका की जांच का आदेश दिया। उसी दिन रेडिफ पर प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 238 के तहत गुरुग्राम पुलिसकर्मियों और सिविल अस्पताल के एक चिकित्सा अधिकारी की भूमिका जांचने को कहा।
इंडियन एक्सप्रेस की 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने गुरुग्राम के पुलिस उपायुक्त से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगतियों का स्पष्टीकरण देने के लिए चिकित्सा अधिकारी को 15 अक्टूबर को बुलाया गया है। ये जांच संबंधी निर्देश हैं; अदालत ने अधिकारियों को साक्ष्य नष्ट करने का दोषी नहीं ठहराया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 29 सितंबर की खबर के अनुसार, अदालत ने सवाल उठाया कि 10 सितंबर को मिले शव की जानकारी पुलिस के जिपनेट डेटाबेस पर 16 सितंबर को क्यों डाली गई, जबकि अंतिम संस्कार 14 सितंबर को हो चुका था। परिवार पहले ही मंचंदा की गुमशुदगी की शिकायत कर चुका था। अदालत ने आवश्यक दस्तावेजीकरण और फॉरेंसिक सामग्री सुरक्षित रखने में कमियां भी चिन्हित कीं।
यह कार्यवाही मंचंदा की बहन की उन अर्जियों पर हुई जिनमें जांच की निगरानी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 सितंबर की पूर्ववर्ती रिपोर्ट में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कुछ कमियां स्वीकार की थीं। उन्होंने शव सुरक्षित रखने की प्रक्रिया का बचाव करते हुए समीक्षा का आश्वासन दिया था। नए आदेश पर चिकित्सा अधिकारी का विशिष्ट जवाब समीक्षा की गई खबरों में उपलब्ध नहीं था।
