सिक्किम हाई कोर्ट ने 2 सितंबर के आदेश में निजी समझौते के आधार पर बलात्कार और बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण कानून के तहत गंभीर यौन हमले का मुकदमा खत्म करने की मांग खारिज कर दी। आदेश 3 सितंबर को अपलोड किया गया था।

न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने पक्षकारों और उनके परिवारों की ओर से पेश समझौते पर विचार किया। सुप्रीम कोर्ट की नजीरों के आधार पर अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों की कार्यवाही निजी सहमति से समाप्त नहीं की जा सकती, भले ही पीड़िता अब वयस्क हो चुकी हो।
इस फैसले से आपराधिक कार्यवाही जारी रहेगी। यह अपने आप में दोषसिद्धि या हर विवादित तथ्य का निर्णय नहीं है। यह तारीख सहित प्रस्तुत अदालती रिपोर्ट कानूनी मुद्दे पर केंद्रित है; पहचान उजागर कर सकने वाली व्यक्तिगत परिस्थितियां शामिल नहीं की गई हैं। पक्षकारों को सलाह मिलने पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगने की स्वतंत्रता दी गई।
