सुप्रीम कोर्ट ने एक अक्टूबर को सिक्किम के बाल दुष्कर्म और हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य से अपराध उचित संदेह से परे साबित नहीं हुआ। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर ने निचली अदालत की दोषसिद्धि रद्द कर दी, जिसे हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था। किसी अन्य मामले में जरूरत न होने पर उसकी रिहाई का आदेश दिया गया है।
फैसले में आरोपी को बच्चे के साथ आखिरी बार देखे जाने के दावे में गंभीर कमियां पाई गईं। अदालत ने दूसरों को आसानी से दिखाई देने वाले स्थान से बरामद सामग्री पर निर्भरता पर भी सवाल उठाया। फोरेंसिक नतीजों से पीड़ित के साथ आवश्यक संबंध स्थापित नहीं हुआ। आरोपी के जवाब अभियोजन के साक्ष्य की कमियों को पूरा नहीं कर सकते।
सिक्किम सरकार के वकील ने दोषसिद्धि का बचाव किया था। उनका तर्क था कि परिस्थितियां और आरोपी के स्पष्टीकरण दोनों निचली अदालतों के निष्कर्षों का समर्थन करते हैं। बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की इस कड़ी को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार कर संदेह का लाभ दिया। बच्चे की पहचान सुरक्षित रखने के लिए पारिवारिक रिश्ते और पहचान संबंधी विवरण नहीं दिए जा रहे हैं। फैसले से अपराध के वास्तविक जिम्मेदार व्यक्ति का निर्धारण नहीं होता।
