मद्रास हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को कारोबारी आर वीरमणि के खिलाफ बाल यौन शोषण मामले की जांच से जुड़ी डीएमके कोषाध्यक्ष टी आर बालू की अर्जी की सुनवाई चार सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दी। डीटी नेक्स्ट के अनुसार न्यायमूर्ति वी लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि विशेष जांच दल को बिना हस्तक्षेप अपना काम जारी रखने देना चाहिए।

बालू ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय तथा मंत्रियों आधव अर्जुन और सी टी आर निर्मल कुमार से पूछताछ की मांग की थी। उन्होंने डीएमके पर वीरमणि को बचाने के सार्वजनिक आरोपों के बारे में सवाल उठाए थे। यूएनआई की 29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार डीएमके ने इन आरोपों से इनकार किया। मामले को दबाने के दावे अभी विवादित आरोप हैं; इस सुनवाई में उन्हें साबित नहीं माना गया।

बार एंड बेंच के अनुसार याचिका में बालू के 27 सितंबर के अभ्यावेदन पर कार्रवाई मांगी गई। डीएमके चाहती थी कि नेताओं के सार्वजनिक बयानों से जुड़े दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री या संवाद सुरक्षित रखकर जांचे जाएं। उसने सूचना के स्रोत की जांच भी मांगी।

बालू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे रवींद्रन ने कहा कि मामले को दबाने का कोई साक्ष्य हो तो जांचकर्ताओं को सौंपा जाए। बाल यौन शोषण से जुड़े आरोपों की गंभीरता के कारण उन्होंने तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार न्यायाधीश ने अभ्यावेदन हाल में दिए जाने का उल्लेख करते हुए तुरंत हस्तक्षेप से इनकार किया। अर्जी स्वीकार या अंतिम रूप से खारिज नहीं हुई; सुनवाई स्थगित हुई है।

बार एंड बेंच के अनुसार तीनों नेताओं को जांचकर्ताओं के सामने उपस्थित होने का कोई आदेश नहीं दिया गया। सुनवाई स्थगित होने के बाद अर्जी लंबित है। इस निर्णय से मामले को दबाने के परस्पर विरोधी दावों का निपटारा नहीं होता।