दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को उस लूट के मामले में अजय कुमार उर्फ डॉक्टर को जमानत दी, जिसमें एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने 20,000 रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का एक जमानती देने का निर्देश दिया।
पांच पन्नों के आदेश में अभियोजन का आरोप दर्ज है कि आवेदक ने स्थान की रेकी करके दूसरों को जानकारी दी थी। राज्य ने फोन संपर्क, स्थान संबंधी डेटा, कथित होटल प्रवास और बरामद नकदी का हवाला देकर जमानत का विरोध किया। बचाव पक्ष ने हिरासत जारी रखने के साक्ष्य पर सवाल उठाए।
अदालत ने पूछा कि संबंधित फोन का इस्तेमाल किसने किया, यह जांच में स्थापित हुआ या नहीं। उसने होटल का अतिथि रजिस्टर जब्त न किए जाने का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, केवल डेढ़ लाख रुपये पास होने से आवेदक का लूट से संबंध साबित नहीं होता।
टिप्पणियां केवल जमानत तक सीमित हैं। निचली अदालत साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन करेगी। यह दोषमुक्ति का फैसला नहीं है।
