भारी उद्योग मंत्रालय ने 28 सितंबर को बताया कि चेन्नई के ओरगडम स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर ने वाहन परीक्षण ढांचे के ₹221.13 करोड़ के विस्तार के लिए उपकरण लगाना शुरू कर दिया है। लगभग सभी प्रस्तावित उपकरणों के खरीद आदेश जारी हो चुके हैं। GARC केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत अधिकृत परीक्षण एजेंसी है; यह कार्यक्रम वाहन निर्माण के बजाय परीक्षण और प्रमाणन क्षमता बढ़ाता है।

काम में इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरियां, विद्युतचुंबकीय हस्तक्षेप व अनुकूलता परीक्षण, भारी वाणिज्यिक वाहन, पावरट्रेन प्रयोगशालाएं, दुर्घटना सुरक्षा उपकरण, वाहन कलपुर्जे और उन्नत चालक सहायता प्रणालियां शामिल हैं। नियंत्रित दुर्घटना परीक्षणों के दौरान वाहन का आकार बदलने, उसमें बैठे व्यक्ति की गति और एयरबैग खुलने को रिकॉर्ड करने के लिए तेज गति वाली इमेजिंग भी कार्यक्रम का हिस्सा है।

यह उन्नयन ₹10,900 करोड़ के पीएम ई-ड्राइव कार्यक्रम का हिस्सा है, जो सरकार के अनुसार अब 31 मार्च 2028 तक चलेगा। पूरे कार्यक्रम में वाहन परीक्षण एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए ₹780 करोड़ निर्धारित हैं। उपकरणों के आदेश और स्थापना प्रगति के संकेत हैं, हर नई प्रयोगशाला चालू होने का प्रमाण नहीं; समीक्षा की गई घोषणा में GARC की प्रत्येक सुविधा के पूरा होने की तारीख नहीं दी गई थी।