लखनऊ के चौक इलाके में बड़ी काली मंदिर के पास 12 वर्षीय अब्दुल्ला और उनके 33 वर्षीय चाचा मोहम्मद सुफियान ने 21–22 सितंबर की रात मारपीट होने का आरोप लगाया है। FOEJ Media ने परिवार के बयान दर्ज किए और 27 सितंबर को Maktoob ने सुफियान से अलग से बातचीत की। परिवार का कहना है कि उनके घर और पास की मस्जिद पर पत्थर फेंके गए। ये जांच के दायरे में आरोप हैं, नामजद लोगों के खिलाफ अदालत के निष्कर्ष नहीं।

घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।
घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।

अब्दुल्ला ने FOEJ को बताया कि कुछ युवकों ने पहले उनसे सिगरेट लाने को कहा। इनकार करने पर कथित तौर पर “जय श्री राम” बोलने को कहा गया। बच्चे के अनुसार, एक व्यक्ति ने थप्पड़ मारा और दूसरे ने धातु के कड़े से उनके सिर पर चोट पहुंचाई। Maktoob से अलग बातचीत में सुफियान ने बच्चे से सुनी बात बताई और कहा कि बच्चा घर का सामान लेने निकला था। इस बातचीत और धार्मिक नारा लगाने की कथित मांग की स्वतंत्र पुलिस या न्यायिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।
दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।

परिवार का कहना है कि भीड़ अब्दुल्ला के पीछे घर तक आई, घर और मस्जिद पर पत्थर फेंके गए और परिजनों ने भीतर बंद होकर खुद को बचाया। सुफियान के अनुसार, उस समय वे बाहर थे; फोन आने पर लौटे तो घर के बाहर लोगों ने उन्हें पीटा। उन्होंने बताया कि सिर में आठ टांके लगे। Maktoob ने बच्चे के सिर में भी चोट की खबर दी। भीड़ की लगभग 200–300 की संख्या और नुकसान का विवरण शिकायतकर्ताओं के बयान और उनकी शिकायत पर आधारित है; इस समय-सीमा तक स्वतंत्र गणना या नुकसान का आकलन उपलब्ध नहीं था।

Maktoob के अनुसार, उसने सुफियान की शिकायत पर चौक पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी देखी। उसमें पांच नामजद और 200–300 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की दंगा, चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी और संपत्ति को नुकसान जैसी धाराएं थीं। दूसरे संस्थानों ने भी FIR की खबर दी है, लेकिन नामों की सूची और वर्तनी में अंतर है; इसलिए इस रिपोर्ट में विरोधाभासी द्वितीयक विवरणों से आरोपियों की पहचान नहीं बताई गई है। FIR आरोप दर्ज कर जांच शुरू करती है, किसी का अपराध सिद्ध नहीं करती।

सुफियान ने Maktoob से पुलिस की कार्रवाई अपर्याप्त होने और परिवार की सुरक्षा को लेकर डर का आरोप लगाया। Maktoob ने कहा कि चौक थाने को कई बार फोन करने पर जवाब नहीं मिला। परिवार ने मस्जिद की जमीन के बारे में अलग विवाद का भी जिक्र किया है। मस्जिद के निर्माण की तारीख, जमीन का स्वामित्व और कथित हमले से उस विवाद का संबंध स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है; इसे साबित मंशा नहीं माना जा सकता।

FOEJ का पोस्ट 26 सितंबर को प्रकाशित हुआ। Maktoob घटना को 21 सितंबर की रात का बताता है, जबकि एक अन्य पुनर्प्रकाशित विवरण में 22 सितंबर देर रात लिखा है। यह रिपोर्ट 21–22 सितंबर की रात का समय दर्ज करती है और तारीख के इस अंतर को स्पष्ट रखती है। 29 सितंबर की समीक्षा तक Asal Sach को पुलिस का सीधा बयान, पूरी FIR की प्रति, मेडिकल रिकॉर्ड, गिरफ्तारी या अदालत का अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध नहीं था। आगे मिलने वाले आधिकारिक रिकॉर्ड को परिवार के बयान और FIR के साथ मिलाकर जांचना होगा।