1 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने माना कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने मार्च 2021 में मकानों को गैरकानूनी तरीके से ध्वस्त किया था। अपीलकर्ताओं में वकील जुल्फिकार हैदर और प्रोफेसर अली अहमद शामिल थे। अदालत ने प्राधिकरण को पांचों अपीलों में छह सप्ताह के भीतर 10-10 लाख रुपये देने का आदेश दिया।

निवासियों को 6 मार्च 2021 को पत्र मिला और अगले दिन मकान तोड़ दिए गए। अदालत ने पाया कि इस प्रक्रिया ने उनसे कानून के तहत अपील का अवसर छीन लिया और आश्रय के अधिकार का उल्लंघन किया। उत्तर प्रदेश ने निर्माण अवैध बताकर कार्रवाई का बचाव किया; अदालत ने माना कि इससे उचित कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी जायज नहीं होती।

फैसले ने जमीन के अधिकारों पर कार्यवाही और अतिरिक्त मुआवजे के दावे का रास्ता खुला रखा। यह गैरकानूनी ध्वस्तीकरण पर विशिष्ट निष्कर्ष है, हर संपत्ति दावे की वैधता या धार्मिक मंशा साबित होने का फैसला नहीं। यहां भुगतान का आदेश दर्ज है; बाद में रकम मिल जाने का दावा नहीं किया गया है।