22 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने कांवड़ मार्ग पर भोजन बेचने वालों से मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित कराने वाले विवादित निर्देशों के अमल पर रोक लगाई। चुनौती मुजफ्फरनगर पुलिस के 17 जुलाई के निर्देश और उत्तराखंड में इसी तरह के कदमों के बाद आई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नाम के जरिए पहचान उजागर होने से मुस्लिम कारोबारियों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव का खतरा था।

अदालत ने परोसे जा रहे भोजन की जानकारी मांगने की अनुमति दी, लेकिन चुनौती दिए गए निर्देशों के तहत व्यक्तिगत पहचान बताने की मजबूरी पर रोक लगाई। 26 जुलाई को अंतरिम संरक्षण जारी रखा गया। उत्तर प्रदेश ने भेदभाव से इनकार करते हुए कहा कि उसका उद्देश्य भोजन चुनने की जानकारी देना और यात्रा के दौरान विवाद रोकना था।

यह प्रविष्टि 2024 के अंतरिम आदेश और दोनों पक्षों के तर्क दर्ज करती है। अस्थायी न्यायिक संरक्षण को अंतिम संवैधानिक फैसला नहीं माना गया है, न इसे बाद के हर खाद्य लाइसेंस या पहचान नियम पर अपने-आप लागू बताया गया है। प्रत्येक बाद के निर्देश की अलग कानूनी और तथ्यात्मक जांच जरूरी है।