कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने 30 सितंबर को कहा कि सरकार धर्मस्थल के पास 2012 में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले की नई जांच टीम में नियुक्त अधिकारियों को लेकर परिवार और जनता की चिंताओं की जांच करने को तैयार है। आईएएनएस ने बुधवार के उनके बयान की रिपोर्ट दी। उन्होंने कहा कि सरकार सत्य सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना चाहती है तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी।
टीवी9 कन्नड़ और एशियानेट सुवर्ण न्यूज की 30 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार बेंगलुरु ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वेंकटेश प्रसन्न ने राज्य सरकार से विशेष जांच दल से मुक्त करने का अनुरोध किया है। रिपोर्टों ने इस अनुरोध को टीम में उनके शामिल होने पर उठी आपत्तियों से जोड़ा। सरकार ने अनुरोध स्वीकार किया है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पत्र की सटीक तारीख भी सत्यापित नहीं हुई।
24 सितंबर के सरकारी आदेश से गठित पांच सदस्यीय टीम का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक एन शशि कुमार कर रहे हैं। द न्यूज मिनट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्थानीय पुलिस, राज्य सीआईडी और सीबीआई की पिछली जांचों में शामिल अधिकारियों को नई टीम में नहीं रखा जाए। नई जांच उन पुराने अनुसंधानों से अलग प्रक्रिया है।
जांच के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी नियुक्त किए गए हैं। मैंगलोर टुडे ने 30 सितंबर को बताया कि 29 सितंबर के आदेश से 16 पुलिसकर्मियों को टीम की सहायता के लिए तैनात किया गया। उन्हें मौजूदा पदों से मुक्त होकर बेंगलुरु में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया। यह आदेश मंत्री के बयान से पहले का है और अपने आप मुख्य टीम की सदस्यता से जुड़ी आपत्तियों का निपटारा नहीं करता।
परिवार की ओर से मामले की जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को नए सिरे से जांच का आदेश दिया था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पहले जिस व्यक्ति पर मुकदमा चला, वह जून 2023 में बरी हो गया था और पुरानी जांचों में महत्वपूर्ण सुरागों की पड़ताल नहीं हुई थी। नई जांच साक्ष्यों को परखने का अवसर देती है; इससे किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता।
