सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को केंद्र सरकार से उन बच्चों के लिए वैधानिक और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर विचार करने को कहा जो स्वतंत्र रूप से सोशल मीडिया खाते खोलते हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की जनहित याचिका सुन रही थी। सुनवाई में प्लेटफॉर्म की सदस्यता की न्यूनतम उम्र पर सवाल उठा, लेकिन अदालत ने स्वयं 18 साल से कम उम्र वालों के खातों पर देशव्यापी प्रतिबंध लागू नहीं किया।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि भारतीय कानून नाबालिग की अनुबंध करने की क्षमता सीमित करता है तो प्लेटफॉर्म 12 या 13 वर्ष के बच्चों को खाते कैसे बनाने देते हैं। उन्होंने सरकार से जांचने को कहा कि क्या सूचना प्रौद्योगिकी के मध्यस्थ नियमों के तहत प्लेटफॉर्म अपनी सदस्यता व्यवस्था भारतीय कानून के अनुरूप बना सकते हैं। पीठ ने समस्या बनी रहने पर अदालत के निर्देशों की संभावना भी उठाई; यह सुनवाई के दौरान चेतावनी थी, किसी प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा हटाने वाला अंतिम आदेश नहीं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि सरकार इस विषय की जांच करेगी और कार्रवाई के लिए तैयार है। उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण व्यवस्था और अभिभावक की सहमति का उल्लेख किया, जबकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि संबंधित डेटा संरक्षण प्रावधान अभी लागू नहीं हैं। इस बातचीत से यह साबित नहीं होता कि उम्र सत्यापन का नया नियम अधिसूचित हो चुका है या सभी किशोरों के मौजूदा खाते अब बंद करने होंगे।

याचिका में डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ बच्चों के स्वतंत्र रूप से समझौते करने के विरुद्ध सुरक्षा उपाय मांगे गए हैं। इसमें उम्र की जांच की व्यवस्था और माता-पिता या अभिभावक के नियंत्रण वाले खाते से शैक्षिक सामग्री तक बच्चों की पहुंच का रास्ता भी सुझाया गया है। ये याचिकाकर्ता की मांगें हैं, पूरे भारत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू किए गए उपाय नहीं।

भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 11 अनुबंध करने की क्षमता को वयस्कता की कानूनी उम्र से जोड़ती है। यह सिद्धांत अलग-अलग प्लेटफॉर्म सेवाओं, अभिभावक की अनुमति और बच्चों की पहुंच पर कैसे लागू हो, इसकी जांच अभी बाकी है। अगला ठोस पड़ाव सरकार का जवाब या औपचारिक रूप से जारी नियम अथवा न्यायिक निर्देश होगा; तब तक 28 सितंबर की सुनवाई को सभी नाबालिगों के लिए लागू सोशल मीडिया प्रतिबंध नहीं बताना चाहिए।