नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान 30 सितंबर को हल्दिया जेल से रिहा हुए। उस दोपहर सियासत में प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से रिहाई की पुष्टि की। प्रधान ने पत्रकारों से कहा कि वह 6 अक्टूबर के मतदान के लिए तुरंत प्रचार शुरू करेंगे।
इसी बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। बार एंड बेंच और कोलकाता टीवी की 30 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने राज्य की जल्द सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और सोमवार, 5 अक्टूबर को मामला सुनने को कहा। राज्य की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हत्या के आरोप का उल्लेख करते हुए चुनाव में भाग लेने के लिए दी गई राहत पर सवाल उठाया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 सितंबर को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोध से जुड़े छह मामलों में अंतरिम जमानत दी थी। बार एंड बेंच के अनुसार, हाईकोर्ट ने ध्यान दिलाया कि कार्रवाई के लिए कई वर्ष उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस ने प्रधान को नामांकन दाखिल करने के बाद गिरफ्तार किया। मामलों में हत्या और दंगे के आरोप शामिल हैं। अंतरिम जमानत से उन आरोपों का निपटारा नहीं होता।
पीटीआई और कोलकाता टीवी के अनुसार, अस्थायी राहत 20 अक्टूबर तक है। बार एंड बेंच ने 21 अक्टूबर को निचली अदालत में आत्मसमर्पण करने की शर्त बताई है। सुप्रीम कोर्ट में चुनौती खारिज होने की संभावना पर रिपोर्ट की गई बातें मौखिक टिप्पणियां थीं; अपील का निपटारा नहीं हुआ था। इस रिपोर्ट के लिए लिखित आदेश स्वतंत्र रूप से प्राप्त नहीं हुए।
