टाइम्स ऑफ इंडिया और प्रकाशित लॉलेन्स केस विश्लेषण के अनुसार, गुजरात उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर को बलात्कार पीड़िता का कुल मुआवजा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया। न्यायमूर्ति वी. के. व्यास ने पाया कि निचली अदालत ने पहले की राशि तय करने का आधार नहीं समझाया था।
पीड़िता ने पीड़ित मुआवजा व्यवस्था के तहत राशि बढ़ाने की मांग की थी। अखबार के अनुसार, राज्य ने परिस्थितियों को देखते हुए लागू योजना की कम से कम न्यूनतम राशि देने का समर्थन किया। अदालत ने हुए नुकसान और पुनर्वास की जरूरत पर विचार किया। मुआवजे की यह कार्यवाही पहले हो चुकी दोषसिद्धि के बाद की है; यह नया आपराधिक फैसला नहीं है।
पांच लाख रुपये कुल मुआवजा है, अलग से मिलने वाले पांच लाख नहीं। खबरों से भुगतान पूरा होना स्थापित नहीं होता। देखी गई सामग्री में हस्ताक्षरित निर्णय उपलब्ध नहीं था। पीड़िता की पहचान बताने वाले विवरण शामिल नहीं हैं।
