दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने चार अक्टूबर को बताया कि कथित फर्जी सरकारी दस्तावेजों की जांच में कुशल समीर मेहता को गिरफ्तार किया गया है। रविवार को द स्टेट्समैन और एएनआई में प्रकाशित पुलिस के विवरण के अनुसार उसे एक अक्टूबर को मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया था। चार अक्टूबर को इसकी जानकारी दी गई; गिरफ्तारी उसी दिन नहीं हुई थी।
वित्त मंत्रालय की शिकायत पर वर्ष 2022 में दर्ज एक मामले में लगभग 7.62 करोड़ रुपये और 11 करोड़ रुपये के सरकारी भुगतान कराने के कथित प्रयास की जांच हो रही है। पुलिस का आरोप है कि इसके लिए फर्जी स्वीकृति पत्र और भुगतान संबंधी दस्तावेज इस्तेमाल किए गए। रिपोर्टों के अनुसार सत्यापन के बाद सरकारी भुगतान जारी नहीं हुए। इसलिए इन राशियों को सरकार से वास्तव में निकाली गई रकम नहीं माना जा सकता।
वर्ष 2025 के अलग मामले में गुजरात के एक कारोबारी का आरोप है कि उसने करीब 3.12 करोड़ रुपये दिए। कारोबारी के अनुसार मेहता ने सरकारी संपर्कों के जरिए आधिकारिक काम कराने और रकम की वसूली में मदद का आश्वासन दिया था। एएनआई और द अर्थ न्यूज ने चार अक्टूबर को इस शिकायत का विवरण प्रकाशित किया। कारोबारी के बताए नुकसान का आरोप अभी जांच के अधीन है और वह सरकारी भुगतान के कथित प्रयास से अलग है।
पुलिस के अनुसार मुंबई से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद मेहता को दिल्ली लाया गया और पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेजा गया। जांचकर्ता दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया, वित्तीय और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा अन्य लोगों की संभावित भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं। समीक्षा की गई सामग्री में मूल प्राथमिकी, रिमांड आदेश और मेहता या उसके वकील की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। गिरफ्तारी और हिरासत से दोष सिद्ध नहीं होता।
