आईआईटी दिल्ली के एक पीएचडी शोधार्थी की मौत के बाद दिल्ली पुलिस ने चार अक्टूबर को आपराधिक मामला दर्ज किया। शोधार्थी का अगस्त से एम्स में इलाज चल रहा था। चार अक्टूबर को पीटीआई और इंडिया टुडे में प्रकाशित पुलिस के विवरण के अनुसार अस्पताल में उनकी मृत्यु के अगले दिन किशनगढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई।

पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आईआईटी दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर की गई। समीक्षा की गई रिपोर्टों में शिकायत, प्राथमिकी या संबंधित न्यायालय आदेश की प्रति नहीं दी गई। मामला दर्ज होने से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं होता।

पुलिस के विवरण के अनुसार शोधार्थी 18 अगस्त को मुनिरका के किराए के आवास में घायल और बेहोश मिले थे। उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। 45 दिन से अधिक इलाज के बाद तीन अक्टूबर को उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि घटना संस्थान के परिसर के बाहर हुई थी।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि कार्यवाही के दौरान परिवार के सदस्यों और गवाहों ने किसी व्यक्ति पर संदेह या आरोप नहीं जताया। यह अब तक जुटाई गई जानकारी के बारे में पुलिस का कथन है। इसे परिवार से स्वतंत्र रूप से प्राप्त बयान या घटना का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

चोट लगने और मृत्यु की परिस्थितियों की जांच जारी है। पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों में सीसीटीवी फुटेज और दर्ज बयानों का उल्लेख किया। समीक्षा की गई रिपोर्टों में किसी गिरफ्तारी की घोषणा, किसी आरोपी की पहचान या जिम्मेदारी पर न्यायालय के निष्कर्ष की जानकारी नहीं दी गई। चार अक्टूबर की नई कार्रवाई आपराधिक मामला दर्ज करना है; मृत्यु की वजह का कोई नया निर्णायक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।