सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार विस्फोट मामले में अहमद बावा उर्फ अब्बू अबूबकर बरेलवी की चुनौती पर विचार करते हुए एक अक्टूबर को फांसी के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। लाइव लॉ, बार एंड बेंच और पीटीआई की स्वतंत्र खबरों के अनुसार, अदालत ने गुजरात को नोटिस जारी किया। पीटीआई ने निचली अदालत का रिकॉर्ड मंगाने के निर्देश की भी खबर दी।

बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि दोषसिद्धि साजिश के आरोप पर आधारित थी। पीटीआई के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की गंभीरता पर जोर दिया। पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे।

जुलाई 2008 के विस्फोटों में 56 लोग मारे गए थे। विशेष अदालत ने 2022 में मृत्युदंड दिया और गुजरात उच्च न्यायालय ने जुलाई 2026 में उसे बरकरार रखा। आज का संरक्षण इस अपीलकर्ता की चुनौती पर विचार के दौरान फांसी के क्रियान्वयन से संबंधित है। इससे बरी होना, सजा बदलना या रिहाई स्थापित नहीं होती। देखी गई सामग्री में सुप्रीम कोर्ट का हस्ताक्षरित आदेश और अगली सुनवाई की तारीख उपलब्ध नहीं थी।