फरवरी 2020 के अंतिम दिनों में उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सांप्रदायिक हिंसा में मुसलमान और हिंदू मारे गए। पुलिस ने बाद में 53 मौतें बताईं। यह अभिलेख दस्तावेजों में दर्ज मुस्लिम पीड़ितों पर केंद्रित है, साथ ही यह मानता है कि हिंसा में कई घटनास्थल, आरोपी समूह और जांचें थीं; यह एक समान निष्कर्ष वाला एक आपराधिक मामला नहीं था।

शुरुआती पीड़ित सूचियों में मुबारक अली, मोहम्मद इरफान, सुलेमान, मोहम्मद शहबान, अकबरी, आमिर खान, हाशिम अली, मुशर्रफ, जाकिर, अशफाक हुसैन, परवेज आलम, मेहताब, मोहम्मद फुरकान, मुदस्सिर खान और शाहिद अल्वी शामिल थे। बाद की सूची में अमन, मारूफ, मोहम्मद यूसुफ, मुबारक हुसैन, मोनिस, बब्बू सलमानी, अयूब शब्बीर, अनवर कस्सार, मोहसिन अली और आफताब भी दर्ज थे। अलग रिकॉर्ड में वर्तनी बदलती है; नामों के अंतर से अतिरिक्त घटनाएं नहीं गिनी जातीं।

अकबरी की मृत्यु उनके घर में आग लगाए जाने पर हुई; बाद के पुलिस आरोपपत्र में उस मामले में छह लोगों को आरोपी बनाया गया। आमिर खान और उनके भाई हाशिम अली की मौतों की जांच गोकलपुरी इलाके के नालों के आसपास हुए हमलों के संबंध में हुई। ये विशिष्ट जांचें थीं, व्यापक हिंसा में गिरफ्तार हर व्यक्ति के खिलाफ दोष के निष्कर्ष नहीं।
29 जून 2020 को पुलिस ने हमजा, आमीन और भूरे अली की मौतों से जुड़े आरोपपत्र दाखिल किए। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि हथियारबंद समूह ने मुसलमानों की पहचान कर उन्हें निशाना बनाया और समन्वय के लिए व्हाट्सऐप समूह इस्तेमाल किया। ये अभियोजन के दावे थे जिन्हें अदालत में साबित करना जरूरी था; आरोपपत्र दाखिल होना दोषसिद्धि नहीं था।
इश्तियाक खान, जिनका नाम अंग्रेजी में Ishteyaque और Ishtiyak भी लिखा गया, कबीर नगर के इलेक्ट्रिशियन थे; परिवार ने गोली लगने से उनकी मृत्यु का विवरण दिया। अनवर कस्सार के भाई सलीम ने कहा कि उन्होंने शिव विहार में अनवर पर हमला देखा। संक्षिप्त और अलग वर्तनी वाले नाम इसी संयुक्त रिकॉर्ड में रखे गए हैं, उन्हें नई घटनाएं नहीं गिना गया है। फैजान की मृत्यु और कथित पुलिस हमले की अलग अभिलेख फाइल पहले से है।
यह संयुक्त रिकॉर्ड नाम और 2020 के चुनिंदा अभियोजन पड़ाव सुरक्षित रखता है, संपूर्ण पीड़ित रजिस्टर या हर मामले की मौजूदा स्थिति का दावा नहीं। बाद की रिहाई, दोषसिद्धि, अपील और सुधार संबंधित घटना और आरोपी से ही जोड़े जाने चाहिए। कुल मौतों को अभिलेख फाइलों की संख्या या किसी एक राजनीतिक प्राधिकरण के खिलाफ आरोप के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।