कर्नाटक ने 13 मई 2026 को 5 फरवरी 2022 का वर्दी संबंधी आदेश वापस लिया। भाजपा की राज्य सरकार के समय जारी पुराना आदेश कक्षाओं में मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने पर पाबंदियों और उससे जुड़ी कानूनी चुनौती के केंद्र में था।

घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।
घटना या नीति का संदर्भ। यह मूल तथ्यात्मक ग्राफिक है; श्रेय और पूरा विवरण रिपोर्ट में है।

हाई कोर्ट ने मार्च 2022 में पाबंदियों को कायम रखा। उसी साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीश असहमत रहे: एक ने फैसले को सही माना, दूसरे ने खारिज किया। यह बंटा हुआ फैसला प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट की सर्वसम्मत मुहर नहीं था।

दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।
दर्ज कानूनी पड़ाव। यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड वर्तमान अंतिम स्थिति तय नहीं करता।

बाद की राज्य नीति ने वर्दी के साथ हिजाब, पगड़ी और जनेऊ जैसे सीमित पारंपरिक प्रतीकों को अनुशासन, सुरक्षा और पहचान की शर्तों पर अनुमति दी। सरकार ने इसे संस्थागत नियमों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संतुलन बताया; भाजपा आलोचकों ने तुष्टीकरण कहा। नीति का बदलना और अंतिम अपीलीय निर्णय अलग घटनाक्रम हैं।