केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को मंजूरी दी। इसमें राज्यों के भीतर बिजली पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने के साथ नवीकरणीय बिजली के लिए बैटरी भंडारण शामिल है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, वित्त वर्ष 2032–33 तक 135 गीगावॉट तक नवीकरणीय बिजली को ग्रिड से जोड़ने और 50 गीगावॉट-घंटे बैटरी भंडारण लगाने का लक्ष्य है।

कार्यक्रम के लिए ₹54,082 करोड़ की केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है। मनी9 की 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बैटरियां नवीकरणीय बिजली उत्पादन केंद्रों या ग्रिड के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाई जा सकेंगी। इनका उद्देश्य उत्पादन के उतार-चढ़ाव को संभालना और सौर बिजली उपलब्ध न होने पर मांग पूरी करने में सहायता देना है। ये प्रस्तावित क्षमताएं हैं, पहले से चालू उपकरण नहीं।

मंत्रिमंडल की विज्ञप्ति के मुताबिक, राज्य पारेषण कंपनियां क्रियान्वयन की देखरेख करेंगी। नई पारेषण परियोजनाओं के लिए शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली का तरीका अपनाया जाएगा। मौजूदा नेटवर्क के सुधार कार्य लागत के ऊपर स्वीकृत प्रतिफल वाली व्यवस्था के तहत होंगे। द बेटर आंध्र की 30 सितंबर की रिपोर्ट में भी इन्हीं क्रियान्वयन प्रावधानों और बैटरी भंडारण का विवरण है।

सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय सहायता पारेषण शुल्क का बोझ घटाएगी और गैर-जीवाश्म ऊर्जा के व्यापक लक्ष्यों में मदद करेगी। ये अपेक्षित लाभ हैं। मंजूरी से ही बिजली लाइनें पूरी होने, घरेलू बिल घटने या उत्सर्जन में मापी गई कमी की पुष्टि नहीं होती। इन नतीजों का आकलन करने से पहले स्वीकृत बुनियादी ढांचे का निर्माण, खरीद और संचालन जरूरी होगा।