उज्जैन की शाही मस्जिद के पास 28 सितंबर को झड़प हुई, जब अधिकारी 2028 के सिंहस्थ आयोजन से जुड़ी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए मस्जिद का एक हिस्सा हटाने पहुंचे। कई विवरणों और रिकॉर्ड किए गए दृश्यों में पथराव तथा पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले दागना दिखाई दिया; पुलिस ने लाठियां भी चलाईं। अधिकारियों ने रैपिड एक्शन फोर्स सहित करीब 2,500 कर्मियों को तैनात किया।
अलग-अलग मौके के विवरणों और जिला प्रशासन की ओर से साझा जानकारी के अनुसार टकराव के बाद मस्जिद समुदाय के सदस्यों ने सड़क के लिए चिह्नित हिस्सा हटाना शुरू किया। यह रिपोर्ट पूरी कार्रवाई समाप्त होने का दावा नहीं करती: अपडेट तैयार होने तक काम की सटीक सीमा और नमाज कक्ष, मीनार तथा संबंधित दरगाह की स्थिति स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हो पाई थी।
पुलिस ने लगभग छह अधिकारियों के घायल होने की बात कही और दस लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की, जिनमें पांच को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताया गया। विवरणों में अंतर है कि सभी दस गिरफ्तार हुए या बाहर से आए पांच लोगों को हिरासत में लिया गया, इसलिए गिरफ्तारी की अंतिम संख्या नहीं दी जा रही है। आरोप दोषसिद्धि नहीं हैं और प्रदर्शनकारियों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं मिली।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 सितंबर को दो याचिकाएं खारिज करते हुए पाया था कि निगम ने आपत्तियां सुनीं, वैधानिक प्रक्रिया अपनाई और सार्वजनिक सुरक्षा व यातायात प्रबंधन के लिए कार्रवाई की। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कार्रवाई धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और संपत्ति संबंधी संरक्षणों का उल्लंघन करती है।
28 सितंबर की अपील सुनवाई के कई विवरणों के अनुसार मस्जिद पक्ष और उज्जैन नगर निगम की सहमति दर्ज होने के बाद खंडपीठ ने मामला समाप्त कर दिया। बताए गए समझौते के तहत विवादित ढांचे का करीब तीन फुट हिस्सा और एक दुकान हटाई जानी है, जबकि नगर निगम पक्ष लगभग साढ़े नौ फुट हटाना चाहता था। कुछ विवरण अपील खारिज होने की बात कहते हैं, जबकि अधिक विस्तृत सुनवाई विवरण समझौता स्वीकार कर अपील निस्तारित होने की बात बताते हैं; यह अपडेट तैयार होते समय हस्ताक्षरित आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं था। झड़पों की पुलिस जांच अभी अनसुलझी है।
