संयुक्त राष्ट्र की नस्लवाद विरोधी समिति ने 25 अगस्त को भारत में रोहिंग्या, बांग्लाभाषी मुसलमानों, प्रवासियों और शरण चाहने वालों को प्रभावित करने वाली कथित अपमानजनक कानून-प्रवर्तन कार्रवाइयों पर चिंता जताई। उसके निष्कर्ष नस्लीय भेदभाव के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संधि के प्रति भारत के अनुपालन की समीक्षा के बाद आए।
नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति ने पहचान जांच के दौरान प्रोफाइलिंग, मनमानी हिरासत और दुर्व्यवहार के साथ निर्वासन तथा बलपूर्वक वापसी के विवरणों को रेखांकित किया। उसने भारत से सामूहिक निष्कासन से बचने को कहा और कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच व जवाबदेही की मांग की। ये संधि की निगरानी से संबंधित निष्कर्ष हैं, किसी विशेष अधिकारी के खिलाफ आपराधिक फैसले नहीं।
भारत ने 26 अगस्त को आकलन के आरोप खारिज किए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवैधानिक संरक्षणों और देश के कानूनी ढांचे का हवाला देते हुए उन्हें अप्रमाणित व राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। सरकार ने स्थापित प्रक्रियाओं के जरिए जवाब देने की बात कही। यह रिपोर्ट अगस्त के उस आदान-प्रदान पर है; यह निष्कर्षों को सितंबर की नई घटना के रूप में पेश नहीं करती और किसी व्यक्तिगत जांच का नतीजा स्थापित नहीं करती।
