पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 30 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के कार्यान्वयन दिशानिर्देश जारी किए। पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय क्षेत्र की इस योजना का स्वीकृत परिव्यय 767 करोड़ रुपये है। इसे नौ तटीय राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों में 2030–31 तक लागू किया जाना है।

नया घटनाक्रम योजना के अमल का ढांचा जारी होना है। घोषणा का अर्थ यह नहीं कि पूरी राशि उसी दिन खर्च के लिए दे दी गई या पर्यावरण सुधार पहले ही हासिल हो चुके हैं। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, कार्यक्रम की वित्तीय अवधि 2025–26 से 2030–31 तक है।

मंत्रालय ने जलवायु जोखिम की पहचान, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्रदूषण प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण का उल्लेख किया। इसमें टिकाऊ पर्यटन, तटीय क्षेत्रों के उपयोग की योजना, शोध और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं। कार्यान्वयन में तटीय राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और अन्य संबंधित पक्षों की भागीदारी अपेक्षित है।

दिशानिर्देशों का उद्देश्य संस्थाओं की जिम्मेदारी, समन्वय और निगरानी स्पष्ट करना है। इकोनॉमिक टाइम्स ने नई अवस्था को पहले मिशन के मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियों और समुद्र तटों से जुड़े काम की पृष्ठभूमि में रखा। प्रकाशित ढांचे से आगे वास्तविक उपलब्धि का पता परियोजनाओं और मापे जा सकने वाले परिणामों से चलेगा।