नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने 3 अक्टूबर को नई दिल्ली के कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में जोखिम के अनुपात में नियमन की जरूरत बताई। उसी शाम पीआईबी की जानकारी के अनुसार, उन्होंने उपभोक्ताओं और बाजार की स्थिरता की सुरक्षा के साथ निवेश और नए प्रयोगों के लिए गुंजाइश बनाए रखने को कहा।

गौबा का कहना था कि तेजी से बदलती तकनीक और कई क्षेत्रों में काम करने वाले कारोबारों के कारण नियामकों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने विशेषज्ञ क्षमता बढ़ाने, जिम्मेदारियां स्पष्ट करने और एक ही गतिविधि पर अलग-अलग पाबंदियां लगाने से पहले नए नियमों की जरूरत परखने पर जोर दिया।

बिजनेस स्टैंडर्ड की 3 अक्टूबर की रिपोर्ट ने भी नियामकों की स्वतंत्रता के साथ पारदर्शी फैसलों, समीक्षा की व्यवस्था और जवाबदेही की उनकी मांग को रेखांकित किया। ये बातें नियमन की भावी दिशा से जुड़ी हैं। इस भाषण से कोई नई छूट, अनुपालन की समयसीमा या बाध्यकारी नियामक सुधार लागू नहीं हुआ।