वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन से 30 सितंबर की मुलाकात के बाद दो अक्टूबर के प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ विरोध पर व्यापारी संगठनों के अलग रुख सामने आए। लोकसत्ता और गुडरिटर्न्स की रिपोर्टों के अनुसार चर्चा में शामिल वितरक तथा मोबाइल खुदरा विक्रेता संगठनों ने व्यापारी शुल्क पर चिंताओं को देखने का आश्वासन मिलने के बाद अपना आह्वान वापस लिया।
फ्री प्रेस जर्नल ने फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन का अलग रुख बताया। उसके अध्यक्ष वीरेन शाह ने कहा कि संगठन विरोध जारी रखेगा और किसी दूसरे संघ को सभी व्यापारियों की ओर से आह्वान वापस लेने का अधिकार नहीं मानता। उनके अनुसार भाग लेने वाली दुकानों की योजना उस दिन यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने की है।
विवाद पात्र अधिक मूल्य वाले व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने नियमों में बदलाव और लागू करने में देरी की मांग की। पढ़े गए बयानों में किसी नए सरकारी आदेश से शुल्क व्यवस्था रद्द या संशोधित किए जाने की घोषणा नहीं थी।
इन दोनों रुखों को पूरे देश में यूपीआई प्रणाली बंद होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए। विरोध भाग लेने वाले व्यापारियों द्वारा भुगतान स्वीकार करने से संबंधित है। बयानों से यह स्थापित नहीं होता कि कितनी दुकानें इसमें शामिल होंगी। इसी तरह कुछ संघों के पीछे हटने का मतलब यह नहीं कि हर संगठन ने विरोध छोड़ दिया है।
