भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने 3 अक्टूबर को कहा कि लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या को फिर बढ़ाने के लिए अगले कुछ वर्षों तक हर साल 36–40 लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत है। वायुसेना दिवस से पहले नई दिल्ली में उन्होंने कहा कि नए लड़ाकू विमान सेवा में आने में देरी से बल पर असर पड़ रहा है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने तेजस एमके-1ए, प्रस्तावित बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान कार्यक्रम और अतिरिक्त सुखोई-30 विमानों से संभावित आपूर्ति पर सिंह का आकलन प्रकाशित किया। ये आंकड़े उत्पादन और खरीद योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ने पर निर्भर हैं। इन्हें पहले से मिले विमान या पक्की वार्षिक आपूर्ति नहीं समझना चाहिए।

रेडिफ में प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह ने फ्रांस से बातचीत पूरी होने पर मौजूदा वित्त वर्ष में 114 राफेल विमानों की प्रस्तावित खरीद को अंतिम रूप देने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि रूस ने एसयू-57 की पेशकश की है, लेकिन भारत ने फैसला नहीं किया है। स्वदेशी एएमसीए कार्यक्रम में देरी हुई तो दूसरे विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है।

सिंह ने यह भी कहा कि विमानों को एकीकृत बल के हिस्से के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने अलग ड्रोन बल की योजना से इनकार किया और कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से क्षमताएं बढ़ें, लेकिन महत्वपूर्ण फैसले मनुष्य लें। 3 अक्टूबर की बातचीत में आकलन और योजनाएं रखी गईं; राफेल समझौते पर हस्ताक्षर या किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के विमान का चयन घोषित नहीं हुआ।