सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सिफारिश के बाद 30 सितंबर को नई पीढ़ी की तय श्रेणी की हरित पटाखा लड़ियों के निर्माण और बिक्री की अनुमति दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक अक्टूबर की अदालती रिपोर्ट और फ्री प्रेस जर्नल की 30 सितंबर की खबर के अनुसार, अनुमति स्वीकृत संरचना तथा लागू ध्वनि, उत्सर्जन और सुरक्षा शर्तों के अधीन है।

न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने कहा कि दिल्ली के लिए अलग आदेश दिया जाएगा। सुनवाई में पीठ ने पूरे दिन अनियंत्रित आतिशबाजी के साथ पूर्ण प्रतिबंध के प्रति भी असहमति जताई। इन टिप्पणियों से हर इलाके के लिए नई समय-सारणी तय नहीं होती।

केंद्र ने निर्दिष्ट उत्पादों के विशेषज्ञ आकलन पर भरोसा किया। बेरियम वाली अन्य किस्मों का प्रश्न अनिर्णीत रहा और आगे का आकलन 15 अक्टूबर तक पूरा किया जाना है। इसलिए इस अनुमति को हर उस उत्पाद की मंजूरी नहीं माना जा सकता, जिसे हरित पटाखा बताया जा रहा हो।

लंबे समय से चल रही कार्यवाही में त्योहार मनाने के साथ प्रदूषण की चिंताओं पर विचार हो रहा है। अदालत ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर असर का उल्लेख किया। देखी गई खबरों में दिल्ली के लिए 2026 की अंतिम आतिशबाजी अवधि तय नहीं है; पुराने वर्षों की समय-सीमा को अपने आप इस वर्ष का निर्देश नहीं माना जाना चाहिए।