हरियाणा के यमुनानगर जिले के औरंगाबाद गांव में किसानों ने चार अक्टूबर को धान की खरीद धीमी होने का आरोप लगाते हुए हाईवे का एक हिस्सा जाम किया। पीटीआई के अनुसार स्थानीय अधिकारियों से बातचीत के बाद रास्ता खोल दिया गया। अमर उजाला ने भी राष्ट्रीय राजमार्ग 344 पर किसान सभा और धरने की अलग रिपोर्ट दी।

भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में राकेश टिकैत शामिल हुए। किसानों ने गन्ने और गेहूं का भाव बढ़ाने तथा धान में स्वीकार्य नमी की सीमा बढ़ाने सहित कई मांगें रखीं। ये सभा में उठाई गई मांगें थीं; सरकार ने इन्हें स्वीकार कर लिया हो, ऐसी पुष्टि नहीं हुई है।

एएनआई से अलग बातचीत में टिकैत ने जिला अधिकारियों के साथ बैठक और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलने का समय मांगा। उन्होंने कहा कि शिकायतों का समाधान नहीं हुआ तो संयुक्त किसान मोर्चा 12 अक्टूबर की बैठक में आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।

पीटीआई की रिपोर्ट में सरकार का पक्ष शुक्रवार, दो अक्टूबर को दिए गए सैनी के आश्वासन के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा था कि मंडियों में लाया गया धान खरीदा जाएगा और उपायुक्तों को खरीद व्यवस्था की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। यह बयान रविवार के जाम से पहले का है। उपलब्ध खबरों से किसी नई सरकारी रियायत या अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं होती।