मुंबई पुलिस ने सोमवार, पांच अक्टूबर को राज्यपाल के आवास की ओर प्रस्तावित मार्च के सिलसिले में लोगों को हिरासत में लेने की पुष्टि की। हालांकि उसने कांग्रेस के इस आरोप से इनकार किया कि आदिवासी छात्रों को पार्टी मुख्यालय तिलक भवन से गिरफ्तार किया गया। विवाद रात की पुलिस कार्रवाई को लेकर है, जब नाशिक से आए छात्र शिक्षा और छात्रावास सुविधाओं से जुड़ी मांगें उठाने की तैयारी कर रहे थे।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी आधी रात के बाद दादर स्थित पार्टी कार्यालय में घुसे, वहां ठहरे छात्रों को धमकाया और कुछ को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के सदस्य भी हिरासत में लिए गए। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने अलग से कथित कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र बुनियादी सुविधाएं मांगने आए थे।

पुलिस उपायुक्त मनीष कलवानिया ने कहा कि तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस के अनुसार लोक भवन की ओर मार्च की योजना बना रहे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लिया गया और कानूनी कार्रवाई की जा रही थी। पुलिस के बयान में कार्रवाई राज्यपाल के आवास की ओर बढ़ने वाले लोगों से संबंधित बताई गई, पार्टी कार्यालय के भीतर की कार्रवाई नहीं।

छात्रों की मांगों में छात्रवृत्ति और आदिवासी आवासीय स्कूलों तथा छात्रावासों की सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उनके 26 सूत्रीय मांगपत्र में आदिवासी आश्रम स्कूलों में हुई मौतों की स्वतंत्र जांच और आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे की मांग भी है। छात्र नाशिक से अपना आंदोलन मुंबई ले आए थे। वे आजाद मैदान में प्रदर्शन करना और मुख्यमंत्री से मिलना चाहते थे।

सपकाल ने छात्रों की रिहाई की मांग की और चेतावनी दी कि हिरासत जारी रहने पर कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास का घेराव करेंगे। उपलब्ध पुलिस बयान में हिरासत में लिए गए लोगों की सत्यापित कुल संख्या या व्यक्तिगत आरोपों का विवरण नहीं था। पुलिस कांग्रेस कार्यालय में गई या नहीं, यह विवादित है। इस आरोप पर कोई स्वतंत्र निष्कर्ष या रिहाई की पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी।