भारत में जून–सितंबर का दक्षिण-पश्चिम मानसून सत्र दीर्घकालीन औसत से 12.6 प्रतिशत कम बारिश के साथ पूरा हुआ। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 30 सितंबर को बताया कि सामान्य 868.6 मिलीमीटर के मुकाबले 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह मौसमी औसत का 87.4 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार 2001 के बाद यह चौथा सबसे कम मौसमी वर्षा स्तर था।
मौसम विभाग के आकलन पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार यह 2015 के बाद सबसे बड़ी कमी है; तब बारिश सामान्य से 12.7 प्रतिशत कम रही थी। विभाग के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अल नीनो ने कमजोर बारिश में भूमिका निभाई। दीर्घकालीन औसत ऐतिहासिक तुलना का आधार है, हर स्थान पर उतनी ही वर्षा होने का अनुमान नहीं।
देश में बारिश का वितरण असमान रहा। कुछ इलाकों में तेज वर्षा के दौर आए, जबकि अन्य जगहों पर बड़ी कमी रही। इसलिए राष्ट्रीय कमी का मतलब यह नहीं कि हर जिले में सूखा पड़ा या बाढ़ नहीं आ सकती। किसी कृषि क्षेत्र की स्थिति समझने के लिए स्थानीय वर्षा, मिट्टी की नमी और उपलब्ध जल की जानकारी जरूरी है।
नए आंकड़े एक जून से 30 सितंबर तक के सांख्यिकीय सत्र को पूरा करते हैं। इन्हें पूरे देश में बारिश बंद होने या हर जगह से मानसून की वापसी की घोषणा नहीं समझना चाहिए। अगली फसल की तैयारी कर रहे किसानों के लिए कम बारिश के बाद स्थानीय सिंचाई और आगे के मौसम का अनुमान खास मायने रखते हैं। केवल राष्ट्रीय आंकड़े से फसल नुकसान की मात्रा तय नहीं होती।
