आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने चार अक्टूबर को कहा कि निवेश जुटाने वाले देशों के सामने वैश्विक वित्तपोषण की परिस्थितियां कठिन हो रही हैं। सरकारें अधिक कर्ज ले रही हैं और निवेशक ज्यादा प्रतिफल मांग रहे हैं। नई दिल्ली के कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उन्होंने राजकोषीय विश्वसनीयता, कीमतों में स्थिरता और मजबूत बैंकिंग व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के अनुसार, ठाकुर ने चेताया कि जब व्यापार के फैसले सुरक्षा और भू-राजनीतिक विचारों से अधिक प्रभावित होते हैं, तो वस्तुओं और पूंजी की आवाजाही कम सुचारु हो सकती है। उन्होंने घाटा कम करने के प्रयासों, महंगाई नियंत्रण की व्यवस्था और बैंकों की सुधरी स्थिति को निवेश आकर्षित करने में भारत की ताकत बताया। ये नीति और बाजार की परिस्थितियों पर उनके आकलन हैं।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ठाकुर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के लिए डेटा केंद्रों, चिप और बिजली ढांचे में होने वाला निवेश भी पूंजी की मांग बढ़ा सकता है। इसीलिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल का आकलन करते समय ब्याज दरों और बजट घाटे से आगे भी देखना होगा।
मनीकंट्रोल की अलग रिपोर्ट में ठाकुर ने निष्पक्ष व्यापार नियमों और भरोसेमंद आर्थिक साझेदारियों की जरूरत बताई तथा भारत के हाल के व्यापार समझौतों का जिक्र किया। यह संबोधन वित्तपोषण के जोखिमों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर था। इसमें किसी नए निवेश कार्यक्रम की घोषणा या सस्ता कर्ज हासिल होने की पुष्टि नहीं की गई।
