प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव-2 शक्तिकांत दास ने चार अक्टूबर को कहा कि भारत को आयात पर निर्भर क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाते रहना चाहिए। नई दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने दुर्लभ-मृदा तत्वों से बनने वाले स्थायी चुंबकों को इसकी एक मिसाल बताया।
दास ने कहा कि घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजारों में भागीदारी भी बनी रहनी चाहिए। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने ढांचागत सुधार और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की जरूरत बताई। यह संबोधन नीतिगत प्राथमिकताओं पर था; इससे उस दिन चुंबक बनाने की किसी नई योजना की शुरुआत की पुष्टि नहीं होती।
फॉर्च्यून इंडिया की अलग रिपोर्ट के अनुसार, दास ने चेताया कि युद्ध, व्यापार में बिखराव, ऊर्जा कीमतों का उतार-चढ़ाव और महंगाई वैश्विक वृद्धि को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने भारत की मजबूती का श्रेय बेहतर शासन, वित्तीय क्षेत्र की सुधरी स्थिति और पिछले सुधारों को दिया।
एएनआई की रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय क्षेत्र का विकास, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, टिकाऊ विकास और लोगों की क्षमताओं में निवेश को उनके बताए अगले चरण के प्रमुख क्षेत्रों में गिना गया। ये उनके आकलन और प्राथमिकताएं हैं, भविष्य की आर्थिक वृद्धि के स्वतंत्र रूप से सत्यापित पूर्वानुमान नहीं।
