पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 1 अक्टूबर को संपीड़ित बायोगैस के लिए केंद्रीय गोबरधन योजना शुरू की। साथ में मार्गदर्शिका और साझा आवेदन पोर्टल पेश किया गया। मंत्रालय की उसी शाम की विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रिमंडल की मंजूरी 6 अगस्त को मिल चुकी थी।
2026–27 से 2035–36 की योजना का परिव्यय 23,731 करोड़ रुपये है। इसमें गैस खरीद, कीमत, संयंत्र सहायता, पाइपलाइन और ऋण गारंटी शामिल हैं। इंडियन मास्टरमाइंड्स ने भी 1 अक्टूबर को खबर दी।
परियोजना संचालकों के लिए पुस्तिका अलग-अलग सहायता उपाय समझाती है। पोर्टल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को एक जगह लाना है। अधिकारियों ने अनिश्चित आय, कच्चे माल की उपलब्धता, वित्त और जैविक खाद की बिक्री जैसी चुनौतियां बताईं। राज्यों से जमीन, मंजूरियों और बुनियादी ढांचे में मदद की अपेक्षा है।
उत्पादन करीब दस गुना करने का लक्ष्य है; यह उपलब्धि अभी हासिल होने का दावा नहीं है। कृषि अवशेष और जैविक सामग्री से गैस बनाने के लिए चालू संयंत्र और भरोसेमंद आपूर्ति चाहिए। देखे गए स्रोत अनुमानित उत्पादन या रोजगार लाभ मिल जाने का प्रमाण नहीं देते।
