वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांच अक्टूबर को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है, जहां दोनों पक्षों के लिए और रियायतें देना कठिन होगा। नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और समझौते की कुछ गुंजाइश अब भी मिल सकती है।

सीतारमण ने कड़ी बातचीत के बाद वार्ता में ठहराव की स्थिति बताई। उन्होंने किसी अंतिम समझौते, हस्ताक्षर की तारीख या नए शुल्क निर्णय की घोषणा नहीं की। सोमवार का घटनाक्रम बातचीत की स्थिति पर उनका सार्वजनिक आकलन है; इसे वार्ता औपचारिक रूप से खत्म होने की घोषणा नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों का व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और अमेरिका अपना घाटा कम करना चाहता है। इस चिंता के कारण दोनों पक्षों पर बाजार खोलने और रियायतों की गुंजाइश तलाशने का दबाव है।

भारत और अमेरिका फरवरी 2025 से व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। पिछले सप्ताह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद कहा था कि समझौता जल्द होने की संभावना नहीं है। रॉयटर्स ने सोमवार की टिप्पणियों के साथ उस पुराने आकलन का भी उल्लेख किया।

सीतारमण ने यह भी कहा कि व्यापारिक भागीदारों पर दबाव डालने के लिए शुल्क का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जबकि संवाद और एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच अब भी जरूरी हैं। उन्होंने बहुपक्षीय व्यापार संस्थाओं के कमजोर होने के बीच आपूर्ति शृंखलाओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा वाले समझौतों का महत्व बताया। किसी नई स्वीकार की गई रियायत का विवरण नहीं दिया गया।