राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक अक्टूबर को बताया कि उसने तेलंगाना में उत्तर प्रदेश के एक परिवार के 12 सदस्यों से कथित बंधुआ मजदूरी कराने के मामले में रिपोर्ट मांगी है। मामला बाचुपल्ली के एक निर्माण परिसर का है। राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट और साइबराबाद पुलिस आयुक्त को जवाब के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं।

आयोग ने 30 सितंबर की खबर का संज्ञान लिया। उसमें आवाजाही रोकने, दुर्व्यवहार, बहुत कम मजदूरी और असुरक्षित आवास के आरोप थे। आयोग ने कहा कि आरोप सही पाए गए तो यह मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला है। बचाव अभियान पुरानी पृष्ठभूमि है; उसे एक अक्टूबर की कार्रवाई नहीं बताया जा रहा।

अधिकारियों से बचाए गए लोगों की मौजूदा स्थिति, तत्काल देखभाल, आपराधिक जांच, मुक्ति प्रमाणपत्र और पुनर्वास सहायता का ब्योरा मांगा गया है। परिवार की इच्छा हो तो उत्तर प्रदेश वापसी समेत दीर्घकालीन योजना भी देनी होगी। नोटिस जारी होने से किसी नियोक्ता का अपराध साबित नहीं होता।