बॉम्बे हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों ने दो अक्टूबर को महाराष्ट्र में एक घटनास्थल का निरीक्षण किया। मामला एक बच्चे के यौन उत्पीड़न और हत्या से जुड़ी अपीलों का है। लोकसत्ता ने उसी शाम और पुढारी ने तीन अक्टूबर को निरीक्षण की खबर दी। दोनों रिपोर्टों के अनुसार, जांच से जुड़े पुलिस अधिकारी वहां मौजूद थे।
अदालत ने 22 सितंबर के आदेश में निरीक्षण तय किया था, ताकि मुकदमे में पहले से दर्ज गवाहियों के संदर्भ में जगहों और उनके बीच की दूरियों को समझा जा सके। अभियोजन और बचाव पक्ष ने आपत्ति नहीं की थी। वकीलों को उपस्थित रहने और बाद में अपनी दलीलें रखने की अनुमति थी।
हाई कोर्ट में दोषसिद्धि और मृत्युदंड के खिलाफ अपीलों के साथ राज्य की ओर से मृत्युदंड की पुष्टि का अनुरोध भी लंबित है। निरीक्षण साक्ष्यों को परखने की प्रक्रिया का हिस्सा था। इससे किसी दोषसिद्धि या सजा की पुष्टि अथवा उसे रद्द करने का फैसला नहीं हुआ।
देखे गए स्रोतों में अपीलों का अंतिम फैसला या निरीक्षण के प्रकाशित निष्कर्ष नहीं मिले। कानूनी नतीजे में बदलाव के लिए अदालत का अगला निर्णय जरूरी होगा।
