उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने चार अक्टूबर को चंपावत के बनबसा में हुई बैठक में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी। राज्य के सूचना विभाग की विज्ञप्ति बैठक और उसमें लिए गए निर्णयों की पुष्टि करती है। जागरण और आईएएनएस ने उसी दिन कौशल योजना के लिए स्वीकृत राशि की खबर दी। यह योजना शुरू करने की मंजूरी है; इससे यह साबित नहीं होता कि प्रशिक्षण पूरा हो गया है या रोजगार मिल चुके हैं।

जागरण के अनुसार, योजना पांच वर्ष चलेगी और उच्च शिक्षा की नियमित पढ़ाई के साथ कौशल आधारित पाठ्यक्रम जोड़े जाएंगे। देवभूमि मीडिया और उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट ने इसे मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026 बताया। इन रिपोर्टों के अनुसार, इसका प्रस्तावित दायरा सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध महाविद्यालयों के लगभग 1.19 लाख विद्यार्थी हैं। यह संभावित लाभार्थियों का आंकड़ा है, प्रशिक्षण या नौकरी पा चुके विद्यार्थियों की संख्या नहीं।

बैठक में कुक्कुट आहार सब्सिडी के भुगतान का तरीका बदलने को भी मंजूरी दी गई। चार अक्टूबर को देवभूमि मीडिया और उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित विस्तृत विवरण के मुताबिक, मौजूदा सीबीडीसी/ई-रूपी व्यवस्था की जगह आधार से जुड़े बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाएगा। यह सब्सिडी योजना में भुगतान व्यवस्था बदलने की स्वीकृति है; लाभार्थियों को नई रकम मिल जाने का प्रमाण नहीं।

अन्य निर्णयों में भूमि प्रशासन, निजी विश्वविद्यालयों के मानक और सरकारी सेवा के नियम शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के कुछ तकनीकी विवरण आपस में मेल नहीं खाते, इसलिए उनके आंकड़ों को यहां अंतिम कानूनी शर्त नहीं माना गया है। समीक्षा की गई सामग्री में मूल क्रियान्वयन अधिसूचनाएं और मंत्रिमंडल के सभी निर्णयों का आधिकारिक विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। आवेदन करने वालों और संबंधित संस्थानों के लिए उनका सटीक पाठ, लागू होने की तारीख और विभागीय निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत–नेपाल सीमा के पास एनएचपीसी परिसर में बैठक की अध्यक्षता की। सूचना विभाग की चार अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, चंपावत जिले में पहली बार मंत्रिमंडल की बैठक हुई। धामी ने कहा कि देहरादून से बाहर बैठकें करने से स्थानीय जरूरतें निर्णय प्रक्रिया तक बेहतर ढंग से पहुंचेंगी। यह सरकार का बताया उद्देश्य है; मंजूर योजनाओं के वास्तविक नतीजों का आकलन अलग विषय है।