वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 29 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर की ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप में बदलावों की घोषणा की। पर्यावरण मंत्रालय की उसी शाम जारी पीआईबी विज्ञप्ति के अनुसार, आयोग ने संशोधन को 28 सितंबर की बैठक में मंजूरी दी थी। घोषणा बिगड़ती वायु गुणवत्ता से निपटने के नियमों में बदलाव करती है।
डीजल जनरेटरों और एनसीआर तथा आसपास के राज्यों की बीएस-चार या उससे पुराने मानक वाली बसों से संबंधित उपाय दूसरे चरण से पहले चरण में लाए गए हैं। तीसरे चरण में बीएस-तीन पेट्रोल और बीएस-चार डीजल चारपहिया वाहनों पर प्रतिबंध पहले से शामिल अधिक यातायात वाले जिलों के साथ सोनीपत तक बढ़ाए गए हैं। द पायनियर ने 29 सितंबर को और टाइम्स ऑफ इंडिया ने 30 सितंबर को इन बदलावों की खबर दी। दूसरी रिपोर्ट में आयोग के तकनीकी सदस्य एस. डी. अत्री का पक्ष भी है।
संशोधित ढांचे में आवश्यक वस्तुएं ढोने वाले बीएस-चार या उससे पुराने हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों की छूट तीसरे चरण में तथा ट्रकों की छूट चौथे चरण में हटाई गई है। अलग निर्णय में आयोग ने नगरपालिका सीमा से बाहर पात्र निर्माण परियोजनाओं तक ऑनलाइन धूल-नियंत्रण निगरानी बढ़ाई। कम से कम 500 वर्ग मीटर के भूखंड की मौजूदा सीमा नहीं बदली गई है।
आकाशवाणी की 29 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, संशोधित योजना में चार चरणों के कुल 48 उपाय हैं। ग्रैप के कदम संबंधित चरण और क्रियान्वयन आदेशों के अनुसार लागू होते हैं। नया ढांचा घोषित होना सभी चरणों के अभी सक्रिय होने का प्रमाण नहीं है। समीक्षा की गई घोषणा न मौजूदा वायु गुणवत्ता सूचकांक बताती है और न सभी बसों या निजी कारों पर पूरी पाबंदी स्थापित करती है।
