सुप्रीम कोर्ट ने पांच अक्टूबर को केंद्र को नोटिस जारी कर नई दिल्ली के शास्त्री भवन से केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के प्रस्तावित स्थानांतरण पर विस्तृत हलफनामा मांगा। सरकार को बताना होगा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत पुस्तकालय के लिए कितना क्षेत्र रखा गया है और उसका वास्तविक नक्शा क्या है।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने पूछा कि क्या प्रस्तावित परिसर में शास्त्री भवन के संग्रह के साथ आरके पुरम में बक्सों में रखी किताबें भी समा सकेंगी। सुनवाई में आरके पुरम में करीब दो लाख किताबें रखे होने का उल्लेख हुआ। पीठ ने यह भी पूछा कि सम्मेलन कक्ष और दूसरी सुविधाएं बनाने के बाद किताबें रखने के लिए वास्तव में कितनी जगह बचेगी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि पुस्तकालय के लिए जगह तय की गई है और दो मंजिलों में बड़ा परिसर बनाने की योजना है। उन्होंने सेंट्रल विस्टा के निदेशक के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट पेश की। पीठ ने केवल इस रिपोर्ट को सरकारी आश्वासन मानने के बजाय विस्तृत नक्शों के साथ औपचारिक हलफनामा दाखिल करने को कहा।

यह 135 वर्ष पुराना संस्थान वर्ष 1969 से शास्त्री भवन में है। पुस्तकालय चार मंजिलों में लगभग 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है। इसके संग्रह में दुर्लभ किताबें, सरकारी अभिलेख और गजेटियर शामिल हैं। पुनर्विकास के लिए शास्त्री भवन को गिराने के प्रस्ताव के कारण इस बड़े संग्रह को उपयुक्त जगह मिलने का सवाल उठा है।

अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरिप्रिया पद्मनाभन को मामले में अपनी सहायता के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया। तीन अक्टूबर को दर्ज मामले में सोमवार के निर्देश अब प्रस्तावित जगह की स्पष्ट जानकारी मांगते हैं। इन निर्देशों से नए पुस्तकालय को मंजूरी नहीं मिली है और न ही यह अंतिम निष्कर्ष निकला है कि प्रस्तावित जगह पर्याप्त होगी।