दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने एक अक्टूबर को राजधानी कॉलेज के पास मार्च निकालकर यौन हिंसा के एक कथित मामले में न्याय और बेहतर सुरक्षा की मांग की। उसी शाम पीटीआई ने बताया कि यह छात्राओं का अपना, केवल महिलाओं के लिए आयोजित प्रदर्शन था। आयोजकों ने राजनीतिक समूहों को शामिल नहीं किया और शिवाजी कॉलेज की ओर जाने का प्रस्तावित रास्ता बताया।
यह नया मार्च रोजाना आने-जाने के दौरान उत्पीड़न पर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा था। द पाई न्यूज़ ने एक अक्टूबर को छात्राओं के हवाले से बताया कि उन्हें मोटरसाइकिल पर पीछा किए जाने, फब्तियों और घर, कक्षा तथा सार्वजनिक परिवहन के बीच अंधेरे रास्तों से बचने जैसी परेशानियां होती हैं।
शिक्षा संबंधी इस प्रकाशन ने छात्र संघ की बेहतर रोशनी, नियमित गश्त और महिला पुलिस सहायता बूथों के रखरखाव की मांग भी बताई। इन मुद्दों से न्याय की मांग के साथ सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित पहुंच का सवाल भी सामने आता है।
देखी गई रिपोर्टों में इस विशेष मार्च की सत्यापित उपस्थिति या विश्वविद्यालय और पुलिस की कोई नई प्रतिक्रिया नहीं थी। पूरे प्रस्तावित रास्ते पर मार्च पूरा होने की पुष्टि भी नहीं हुई। पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले विवरण नहीं दिए गए हैं।
