दिल्ली कैबिनेट ने 29 सितंबर को आईआईटी दिल्ली के साथ प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी करने वाली परियोजना और सड़कों की सफाई के लिए 30 इलेक्ट्रिक मशीनी स्वीपर खरीदने को मंजूरी दी। उसी शाम रेडिफ पर प्रकाशित पीटीआई की खबर ने मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला दिया। द स्टेट्समैन और आउटलुक ने भी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता वाली बैठक के फैसलों की पुष्टि की।

सफाई कार्यक्रम का उद्देश्य छोटी सड़कों तक मशीनी सफाई पहुंचाना है। सरकार ने 250 नगरपालिका वार्डों में लगभग 609 किलोमीटर लंबी 854 सड़कें चिह्नित की हैं, जिनका सड़क अधिकार क्षेत्र दस मीटर से कम चौड़ा है। सरकारी अनुदान से दिल्ली नगर निगम मशीनों की खरीद और संचालन करेगा। इस कार्यक्रम की अनुमानित लागत दस वर्षों में 393.73 करोड़ रुपये है।

आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग अलग पांच वर्षीय परियोजना है, जिसकी अनुमानित लागत 19.22 करोड़ रुपये है। इसमें दिन भर पीएम2.5 और पीएम10 प्रदूषण में वाहनों, सड़क की धूल और जैविक पदार्थ जलाने जैसे स्रोतों के योगदान का आकलन किया जाना है। योजना में राउज एवेन्यू निगरानी केंद्र और चलती-फिरती प्रयोगशाला को दोबारा सक्रिय करना, डैशबोर्ड बनाना और प्रदूषण नियंत्रण कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना शामिल है।

ये प्रस्तावित कामों के लिए कैबिनेट की मंजूरियां हैं। घोषणाओं में इस बात का प्रमाण नहीं दिया गया कि नई सफाई मशीनें काम करने लगी हैं या प्रदूषण में कमी हासिल हो चुकी है। खरीद, नियमित संचालन और निगरानी से मिलने वाले आंकड़ों की उपयोगिता से कार्यक्रम के व्यावहारिक नतीजे स्पष्ट होंगे।